फूलदेई एक खूबसूरत त्योहार है जो उत्तराखंड के लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल बसंत ऋतु के आगमन के साथ मनाया जाता है, जब बर्फ पिघलने लगती है और फूलों की बहार शुरू होती है। गाँव के बच्चे इस दिन बहुत खुश रहते है और सुबह-सुबह जागकर नंगे पैर खेतों में दौड़ पड़ते है । वे सुंदर-सुंदर फूल इकट्ठा करते है और उन्हें देवी के लिए सजाते है । इसे आमतौर पर चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है, जो मार्च या अप्रैल में आता है। फूलदेई का अर्थ है "फूलों का उत्सव", और यह क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल फुलदेई के आसपास पूरे गाँव में खास तैयारी शुरू होती है। बच्चे और बड़े सभी मिलकर इस त्योहार का बेसब्री से इंतज़ार करते है।
क्यों फूलदेई को बच्चों का त्योहार कहा जाता है?
कहा जाता है कि फुलदेई का पर्व तब शुरू हुआ जब एक बार गांव के लोग बहुत दुखी और उदास थे। उनके फसल खराब हो गए थे और गाँव में सूखा पड़ गया था, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो गया था। लोग देवी-देवताओं की कृपा की कामना कर रहे थे और उनकी दुआएँ सुनने के लिए प्राथना कर रहे थे। एक दिन, गाँव के बच्चों ने सोचा कि क्यों न फूलों की देवी को प्रसन्न करने के लिए एक विशेष आयोजन किया जाए। उन्होंने सोचा कि फूलों के माध्यम से प्रकृति की सुंदरता को मान्यता दी जाए। बच्चें घरों से फूलों को इकट्ठा करने लगे और नाच-गाकर गाने लगे। जब बच्चों ने फूलों से भरी मालाएँ बनाई और गीत गाते हुए गांव में घूमना शुरू किया, तो देवी देवता उनकी मासूमियत और खुशियों को देखकर प्रसन्न हुए। धीरे-धीरे, देवी-देवताओं की कृपा से गाँव में फिर से वर्षा होने लगी और फसलें हरी-भरी होने लगीं।इस घटना ने गाँव वालों को यह सिखाया कि खुशी और प्रज्ञा के मूल में प्रकृति की सुंदरता और बच्चों की मासूमियत है।
फूलदेई के दिन, बच्चे सुबह-सुबह उठकर अपने घरों से बाहर निकलते हैं। वे रंग-बिरंगे फूलों की टोकरी लेकर निकलते हैं और गांव के हर घर में फूलों के गुच्छे डालते हैं। गांव के यह परंपरा फूलों की भक्ति और प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शाती है। बच्चे मिठाई, फल और छोटे उपहारों के लिए भी जाते हैं जिन्हें उन्हें घरों से प्राप्त होते हैं। यह एक प्रकार का समाजिक समारोह है, जिसमें बच्चे एक-दूसरे के साथ मिलकर ग्रुप में गाते और नृत्य करते हैं।
इस दिन के दौरान, घरों को रंगीन फूलों और पत्तियों से सजाया जाता है। घर के आंगन में फूलों की खास सजावट की जाती है, जिससे वातावरण और भी खुशनुमा और जीवन्त बन जाता है। यह त्योहार न केवल बच्चों के लिए, बल्कि पूरे गांव के लोगों के लिए उत्सव और मौज-मस्ती का मौका होता है। फूलदेई के पर्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू है, यह समुदायों में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है। परिवार और पड़ोसी एक साथ मिलकर यह त्योहार मनाते हैं, जिससे सामूहिकता का अनुभव होता है। इस अवसर पर कई तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं, जो इस पर्व को और भी विशेष बनाते हैं। समय के साथ, फूलदेई ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक समारोह का रूप ले लिया है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपने मूल सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में मदद करेगा।
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