अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स पिघलने का कारण: जलवायु परिवर्तन
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अंटार्कटिका, जो दुनिया का सबसे बड़ा बर्फ़ीला महाद्वीप है, ग्लेशियर्स और बर्फ की सघन परतों से अदृश्य है। हालाँकि, हाल के दशकों में, अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स तेजी से पिघल रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। यह घटना न केवल स्थानीय पर्यावरण को प्रभावित कर रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर समुद्र की स्तर में वृद्धि के कारण भी चिंता का विषय बन गई है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन का मतलब है, जलवायु में दीर्घकालिक बदलाव। औद्योगिक क्रांति के बाद से मानव गतिविधियों के कारण, जैसे कि जीवाश्म ईंधनों का जलाना, वनों की कटाई, और औद्योगिक उत्सर्जन,वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है। इससे धरती का तापमान बढ़ रहा है,और यह तापमान वृद्धि अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स पर विशेष प्रभाव डाल रही है।
ग्लेशियर्स का पिघलना
थ्वेट्ज ग्लेशियर दुनिया के सबसे बड़े ग्लेशियरों में से एक है। यह पश्चिमी अंटार्कटिका में है और 1 लाख 92 हज़ार एकड़ में फैला हुआ है। दुनिया के दूसरे ग्लेशियरों की तरह थ्वेट्ज भी पिघल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके नतीजे चिंताजनक हैं। इन ग्लेशियरों की वजह से दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर 60 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। ग्रीनहाउस गैसों की वजह से पानी गर्म हो रहा है। अंटार्कटिका के तट पर स्थित बर्फ़ीले क्षेत्रों का तापमान बढ़ रहा है। ग्लेशियर्स के अंतर्गत बर्फ का घनत्व कम हो रहा है, जिससे बर्फ़ की परतें कमज़ोर हो रही हैं। इसके अलावा, समुद्र की गर्मी भी बर्फ़ के तेजी से पिघलने का कारण बन रही है। जब समुद्र का तापमान बढ़ता है,तो इसका सीधा असर बर्फ़ के तल पर पड़ता है, जिससे नीचे की बर्फ़ पिघलती है और ग्लेशियर्स के ढलान को भी प्रभावित करती है।
समुद्र स्तर में वृद्धि
ग्लेशियर्स का पिघलना वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। जब बर्फ़ पिघलता है, तो यह पिघलकर समुद्र में मिल जाता है, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ता है। इससे बाढ़, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले तूफानों, और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं के जोखिम में वृद्धि होती है।
पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव
अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स में पिघलने से न केवल समुद्र का स्तर बढ़ता है,बल्कि यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रभाव डालता है। जैसे ही बर्फ़ पिघलती है, नमकीन जल और ताजे जल का मिश्रण होता है,जिससे समुद्री जीव-जंतुओं के जीवन चक्र में परिवर्तन आता है। इस में विशेष रूप से फोटोप्लांकटन और पनडुब्बी जीवन प्रभावित होते हैं।
भविष्य में हम इस समस्या पर कैसे काबू पाएँगे?
अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स का पिघलना जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। इसके परिणामस्वरूप न केवल समुद्र का स्तर बढ़ता है,बल्कि दुनिया भर की जलवायु,पारिस्थितिकी, और मानव जीवन पर व्यापक असर पड़ता है। हमें इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। हमें पर्यावरणीय नीतियों का पालन करना चाहिए,ऊर्जा के नवीनीकरणीय स्रोतों को अपनाना चाहिए,और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना चाहिए। अपने द्वारा की गई गतिविधियों का प्रभाव समझना ज़रूरी है। अगर हम अभी नहीं जागेंगे, तो अंटार्कटिका के ग्लेशियर्स का पिघलना हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
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