मॉस की अद्भुत दुनिया जानें इसके रहस्य

युगों-युगों से मॉस का दिलचस्प इतिहास

Moss Plant 
हमारे आसपास एक ऐसा पौधा है जो धरती पर डायनासोर से भी पहले से है वास्तव में यह पौधा धरती पर बसने वाले शुरूआती पौधों में से एक है। अगर यह नहीं होता तो धरती पर मानव जीवन भी नहीं होता। यह पौधा हैं मॉस। धरती पर 44 करोड़ साल पहले यह उत्तरी ध्रुव से लेकर दक्षिणी ध्रुव तक इसकी 12000 से भी ज्यादा प्रजातियां मौजूद  हैं। 

वैज्ञानिकों के अनुसार करोड़ों साल पहले एक पौधा पानी से निकलर जमीन पर आया लेकिन मिट्टी पर पनपना आसान नहीं था। धरती पर पानी के बाहर दिन और रात के तापमान में बहुत ज्यादा फर्क़ था। इस प्रकार यूकेरियोटिक जैसा पौधा मिट्टी में बसा और इसी प्रकार  काई (Moss) की उत्पत्ति हुई। इस प्रकार काई की अन्य प्रजातियों ने धरती को ठंडा करते हुए धरती पर ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाया और सूक्ष्म प्रकार के जीवों के लिए पृथ्वी पर आदर्श जगह बनाई। 
धरती बनने के प्रारंभ में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था,जहां से ज्वालामुखी निकलता है ,वहां सबसे पहले काई की ही उत्पत्ति होती हैं। मॉस ज्यादतर पौधे और अधिकांश छाव वाली जगह पर ही रहते है। मॉस अपने वजन का 12 गुना पानी को अपने स्टोर में रखता है। ब्रायोफाइटा नामक इस जीव के नीचे अतिसूक्ष्म जीव का ब्रह्मांड है। ये जीव कार्बनिक पदार्थ को खनिजों में मिलाते हैं। इस तरह मॉस की भट्टियों में हमेशा के लिए पोषक तत्त्व की रीसाइक्लिंग ऑटोमोबाइल रहती है।

लेकिन मॉस पत्थर पर क्यों होता है? 

Moss in Rocks

मॉस पत्थर पर इसलिए होता है क्योंकि यह नमी, छाया और उचित तापमान की खोज में विकास करता है। पत्थरों और अन्य सतहों पर, मॉस की वृद्धि के लिए आवश्यक शर्तें होती हैं, जैसे कि

(1) नमी जो सबसे पहला कारण है। मॉस को बढ़ने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, और पत्थर पर उपस्थित नमी उसे आवश्यक जल का प्रदान करती है।

(2) छाया जो दूसरा बहुत बड़ा कारण है। बहुत अधिक धूप में मॉस नहीं बढ़ता है। इसलिए, अक्सर यह ऐसे स्थानों पर होता है जहाँ छाया होती है, जैसे कि पेड़ों की छाँव या भवनों के नीचे।

(3) तीसरा कारण है सतह की संरचना, पत्थरों की बनावट और संरचना भी मॉस के लिए अनुकूल हो सकती है, जहां छोटे छिद्र और दरारें मॉस के लिए एक सुरक्षित जगह पैदा करते हैं।

(4) चौथा कारण पोषण भी होता है। मॉस केवल प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से जीवित नहीं रहता, बल्कि उसे पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है, जो पत्थरों की सतह से या आस-पास के मिट्टी से प्राप्त होते हैं।

इस प्रकार से ये सभी तत्व एक साथ मिलते हैं, तो मॉस पत्थरों पर बढ़ने में सक्षम होता है।
पत्थर और चट्टानों पर चिपकने वाली काई धीरे-धीरे  चट्टानों की सबसे ऊपरी सतह को मिट्टी में मिलाती है। इसी ऊपरी मिट्टी में सर्वाधिक सूक्ष्म जीव एवं कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। 

मॉस का महत्व

(1) बिना जड़ वाली मॉस हमें पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के बारे में बताती है। जगल में अगर काई (moss) होगी तो वो सेहतमंद माना जाता है। बड़ी ठंडी जलवायु में मॉस तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

Tree Moss

(2) मॉस मिट्टी में नमी बनाये रखती है और जलस्त्रोतो को भी रिचार्ज करती है। जिन जलधाराओं के आसपास काई होगी वहां आपको पानी काफी साफ नजर आएगा। 

(3) दुनिया में कई सभ्यताओं ने मॉस का ईस्तेमाल दवा ईधन और बिस्तर बनाने का भी काम किया। पहली और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ज़ख्मी सेना के घावों को ठीक करने के लिए काई का उपयोग किया गया था ताकि संक्रमण न फैल सके। 

(4) मॉस का एक छोटा सा झुंड सैकड़ों पेड़ों से ज्यादा हवा साफ करता है। अब विदेशों में घरों की दीवारों को मॉस की हरियाली से ढकने की कलाकृतियां चल रही हैं।

(5) मॉस कोशिका की दीवारों में शुगर (sugar) के अणु होते हैं जो नकारात्मक रूप से आवेशित विद्युत रासायनिक प्रभामंडल बनाते हैं। यह पोटेशियम, सोडियम और कैल्शियम के पोषक आयनों को आकर्षित करते है और पौधा सकारात्मक रूप से आवेशित अम्लीय आयनों को छोड़ता है जिससे एक अनुकूल वातावरण बनता है जो बैक्टीरिया के विकास को रोकता है।

(6) सूखे काई तरल पदार्थ को अवशोषित करते हैं इसलिए चिकित्सा और रोज़मर्रा दोनों में उनके उपयोग को व्यावहारिक बना दिया है अमेरिकी आदिवासी लोग डायपर, घाव की ड्रेसिंग और मासिक धर्म के तरल पदार्थ को सोखने के लिए काई का इस्तेमाल करते थे। कई जनजातियों ने सामन को सुखाने से पहले उसे साफ करने के लिए काई का इस्तेमाल किया और कैमास बल्बों को भाप देने के लिए गीली काई को गड्ढे वाले ओवन में पैक किया यहा तक की खाद्य भंडारण टोकरियाँ और उबलने वाली टोकरियाँ भी काई से भरी जाती थीं।
कहते हैं कि हजारों छोटी-छोटी काई और कवकों की मध्यस्थता से, सबसे बदसूरत वस्तुएं सुंदरता से चमक उठती हैं’


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